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सीएसआईआर -राष्ट्रीय वांतरिक्ष प्रयोगशालाएं
ISO 9001 : 2008 Certified


सीएसआईआर-एनएएल
मिशन &अधिदेश

मिशन

वांतरिक्ष विज्ञान और प्रौद्योगिकी में राष्ट्रीय सामर्थ्‍य का विकास
बुनियादी सुविधा, सुविधाएं और विशेषज्ञता

राष्ट्रीय वांतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए उन्नत प्रौद्योगिकी समाधान
लड़ाकू विमान, गैस टरबाइन इंजन, रक्षा प्रणाली, रक्षा सेवाएं, प्रमोचन यान और उपग्रह, अंतरिक्ष प्रणाली।

नागर वैमांतरिक्ष विकास (1994)
छोटे और मध्यम आकार के नागरिक विमानों का अभिकल्‍प और विकास - भारतीय नागरिक उड्डयन की स्‍थापना

 

अधिदेश

सीएसआईआर-सीएसआईआर-एनएएल का अधिदेश महत्‍वपूर्ण विज्ञान क्षेत्र, अभिकल्‍प और छोटे और मध्यम आकार के नागरिक विमानों के निर्माण के साथ वांतरिक्ष प्रौद्योगिकियों का विकास करना है और सभी राष्ट्रीय वांतरिक्ष कार्यक्रमों में समर्थन देना है।

सीएसआईआर-सीएसआईआर-एनएएल की गतिविधियों में छोटे नागरिक विमानों का अभिकल्‍प, विकास, निर्माण और प्रमाणन शामिल हैं, जो देश का एकमात्र ऐसा केंद्र है। प्रमुख परियोजनाएं जो पूरे हुए हैं/प्रगति पर हैं - दो सीट प्रारंभिक पूर्ण-संमिश्र वायुयान 'हंस-3' (अब तक पंद्रह वायुयान बनाए गए हैं) का प्रमाणीकरण; चौदह सीटों वाला लघु परिवहन वायुयान 'सारस' जो वर्तमान में विकासधीन है (दो प्रोटोटाइप का निर्माण और परीक्षण किया गया है); सीएफसी विंग के साथ उड़ान परीक्षण और अंतिम प्रमाणीकरण के लिए समुच्‍चयन के तहत उत्पादन मानक वायुयान; और महिंद्रा कॉर्पोरेट समूह के तहत मेसर्स महिंद्रा एरोस्पेस प्राइवेट लिमिटेड, बेंगलूरु के साथ मिलकर नया पांच सीटों वाला जनरल एविएशन एयरक्राफ्ट सी-एनएम5 का विकास। वायुयान विकास के क्षेत्र में भारत के प्रथम सार्वजनिक-निजी भागीदारी में सी-एनएम5 ने सफलतापूर्वक 1 सितंबर 2011 को ऑस्ट्रेलिया में अपनी पहली उड़ान भरी।  सीएसआईआर-सीएसआईआर-एनएएल एक अग्रणी एजेंसी है जो राष्ट्रीय नागरिक वायुयान (क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिए 70 और 90 सीटर) के विकास अध्‍ध्‍यन हेतु भारत सरकार द्वारा निर्धारित किया गया है जिसका विकास 12वें पंवयो के दौरान करने का प्रस्ताव है।

पिछले पांच दशकों में सीएसआईआर-सीएसआईआर-एनएएल के प्रतिबद्ध प्रयासों ने वांतरिक्ष प्रौद्योगिकी के कई विषयों में विशेषज्ञता और मुख्य दक्षता प्राप्त करने का प्रमाण दिया है। सीएसआईआर-सीएसआईआर-एनएएल ने हमेशा चुनौतियॉं स्वीकार कर उत्पादों और प्रौद्योगिकियों को सुपुर्द किया है और मिशन-मोड वांतरिक्ष कार्यक्रमों के लिए प्रख्‍यात गंतव्‍य दिया है, जिसके योगदान के बिना संभव नहीं तो मुश्किल तो जरूर होता; इसरो और डीआरडीओ के प्रमुख वांतरिक्ष कार्यक्रमों में सीएसआईआर-सीएसआईआर-एनएएल के योगदान महत्वपूर्ण हैं। सीएसआईआर-सीएसआईआर-एनएएल के सामरिक क्षेत्रों में विकास कार्य ने प्रौद्योगिकी-अस्वीकार्य व्‍यवस्‍था पर काबू पाने में देश की मदद की है और प्रौद्योगिकी आयात उचित माना जाने पर राष्ट्र को बेहतर सौदेबाजी की स्थिति दी है। इसके अतिरिक्त, इसने सामरिक आंकड़ों की गोपनीयता को सुरक्षित रखने में मदद की है और अंतर्राष्ट्रीय क्षेत्र में इसकी प्रतिष्ठा को बढ़ाया है।


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